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रिपोर्ट
व्याख्यान श्रृंखला -04
“भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग एवं संभावनाएं”
कार्यक्रम की तिथि: 16 फरवरी 2026
सौजन्य से : महर्षि स्कूल ऑफ़ ह्यूमैनिटीज़ (एम यूआई टी लखनऊ कैंपस) आई क्यू ए सी के सहयोग से
उद्देश्य: 16 फरवरी 2026 को , महर्षि स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज़ (एम यू आई टी लखनऊ परिसर) ने आई क्यू ए सी के सहयोग से " भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग एवं संभावनाएं” विषय पर व्याख्यान श्रृंखला- 04 का आयोजन किया। जिसका मकसद यह दिखाना था कि कैसे क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल छात्रों के बीच वैचारिक स्पष्टता, समावेशिता और गहरी समझ को बढ़ाता है ।
प्रतिभागी:अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्र।
इवेंट की जानकारी: कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु पूजन के साथ हुआ, जिसके उपरांत संयोजक डॉ. राम प्रकाश दीक्षित द्वारा सत्र का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया गया। एम एस ओ:एच की अधिष्ठाता डॉ. रूपम सिंह ने स्वागत भाषण दिया तथा अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. नीरज जैन ने प्रेरणादायक उद्बोधन के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों को समर्पण, निष्ठा एवं जिज्ञासा की भावना के साथ ज्ञानार्जन करने हेतु प्रेरित किया। विषय विशेषज्ञ डॉ. ऋषि कुमार मिश्र (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज, लखनऊ) ने विषय पर अत्यंत सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि ज्ञान के प्रभावी संप्रेषण में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, तथा उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं के प्रयोग से विद्यार्थियों को जटिल विषयों को स्पष्टता एवं आत्मविश्वास के साथ समझने में सहायता मिलती है। उन्होंने यह विशेष रूप से उल्लेख किया कि मातृभाषा में अध्ययन करने से बौद्धिक सहभागिता सुदृढ़ होती है तथा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों का संदर्भ देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत अभियांत्रिकी, चिकित्सा एवं तकनीकी कार्यक्रमों को भारतीय भाषाओं में क्रमशः प्रारंभ किया जा रहा है तथा प्रतियोगी परीक्षाएँ भी क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं।
कार्यक्रम का समापन एक रोचक एवं सहभागितापूर्ण प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। डॉ. कनु प्रिया वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा डॉ. विजय श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।
विद्यार्थी प्रतिपुष्टि : विद्यार्थियों ने व्याख्यानमाला को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं बौद्धिक रूप से प्रेरक बताया। उन्होंने इस बात की सराहना की कि सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध आधारभूमि के माध्यम से उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को प्रभावी रूप से रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से इस विमर्श को सार्थक एवं आकर्षक पाया, जिसमें समकालीन उच्च शिक्षा प्रणाली में क्षेत्रीय भाषाओं के एकीकरण की सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं ज्ञानमीमांसीय प्रासंगिकता को उजागर किया गया।
आभार ज्ञापन : स्कूल ऑफ मानविकी, विषय विशेषज्ञ डॉ. ऋषि कुमार मिश्र का प्रेरणादायी सत्र हेतु हार्दिक आभार व्यक्त करता है। हम माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) भानु प्रताप सिंह, कुलसचिव डॉ. गिरीश छिमवाल, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. नीरज जैन, अधिष्ठाता (एमएसओएच) डॉ. रूपम सिंह, संयोजक एवं उप-अधिष्ठाता (एमएसओएच) डॉ. आर. पी. दीक्षित के अमूल्य सहयोग के लिए भी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। सभी अधिष्ठाताओं/उप-अधिष्ठाताओं एवं मुख्य प्रॉक्टर को उनके सहयोग हेतु विशेष धन्यवाद। साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राजेश सिंह, आई टी टीम तथा छात्र समन्वयकों को कार्यक्रम की सफलता में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है।